अशोक नगर। पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा-महोत्सव के अंतर्गत सोमवार प्रातः श्री जिनेन्द्र भगवान की भव्य शोभायात्रा एवं विशाल घटयात्रा नगर के मुख्य मार्गों से निकाली गई, जो उत्साह, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण रही। शोभायात्रा सुभाष गंज से प्रारंभ होकर मंडी प्रांगण स्थित अयोध्या नगरी पहुँची, जहाँ मंत्रोच्चार के साथ मंडप व मंडल शुद्धि सम्पन्न कर विश्व शांति महायज्ञ का शुभारंभ किया गया। शोभायात्रा में आगे-आगे कलश धारण किए मातृशक्ति की सहभागिता विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रही। उनके पीछे विभिन्न पात्र अपने रथों पर विराजमान थे तथा विशाल मुनि संघ संघ—नायक निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज की अगुवाई में शोभायात्रा को पावन बना रहा था। मार्ग में श्रद्धालुओं ने मुनि संघ का श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। सभा को संबोधित करते हुए मुनिपुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि “ध्वजारोहण जीवन का सबसे बड़ा मंगल चरण है। यह अवसर व्यक्ति के भाग्य को बदलने की क्षमता रखता है।” उन्होंने कहा कि प्रकृति स्वयं कहती है—अपने जीवन को इतना अच्छा बनाओ कि संसार सुंदर हो जाए। उन्होंने भक्तों को संदेश दिया कि मंदिर जाकर थकान नहीं, बल्कि उत्साह और ऊर्जा लेकर लौटना चाहिए, क्योंकि धर्म मनुष्य के जीवन में मंगलमय प्रवाह लाता है। उन्होंने कहा, “दुनिया में दृश्य का महत्व है, परंतु हमारे यहाँ अदृश्य का। धन धर्म का फल है, इसलिए धर्म रूपी वृक्ष की नियमित सिंचाई आवश्यक है। प्रतिदिन पुण्य कमाएँ, वरना कुबेर का खजाना भी समाप्त हो सकता है।” उन्होंने पंच कल्याणक महोत्सव को जीवन का मंगलाचरण बताते हुए कहा कि यह दुर्लभ अवसर वर्षों बाद प्राप्त होता है और इसका प्रत्येक क्षण मानव जीवन को दिशा देने वाला है। जैन समाज मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि समाज की वर्षों की तपस्या आज ध्वजारोहण के अवसर के साथ पूर्णता की ओर बढ़ रही है। उन्होंने इसे समुदाय का सौभाग्य बताते हुए कहा कि भगवान जिनेन्द्र देव के पंच कल्याणक महोत्सव का आयोजन समाज के लिए ऐतिहासिक क्षण है।
कार्यक्रम में जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री शैलेन्द्र श्रागर, संजीव भारिल्ल, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, संयोजक मनोज रन्नौद, उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, श्रेयांस घैला, टींगूमिल संस्थान के पदाधिकारी तथा अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। समाजजनों द्वारा मुनि संघ को श्रीफल भेंट कर मंगल कामनाएँ व्यक्त की गईं।
महोत्सव के अंतर्गत सभी प्रमुख पात्रों की पात्र-शुद्धि एवं इन्द्र-प्रतिष्ठा प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भाईसाहब द्वारा विधिपूर्वक कराई गई। उन्होंने कहा कि पाषाण से भगवान बनने की प्रक्रिया को ही पंच कल्याणक प्रतिष्ठा कहते हैं। आज पात्र रूप में सहभागी होना सभी के लिए सौभाग्य की बात है। इस अवसर पर भगवान जिनेन्द्र के माता-पिता, इन्द्र-इन्द्राणी और विविध पात्रों की प्रतिष्ठा सम्पन्न कर महायज्ञ की पवित्र प्रक्रिया प्रारंभ हुई।
धार्मिक उल्लास से परिपूर्ण यह आयोजन अयोध्या नगरी के मंडी प्रांगण में निरंतर जारी है, जिसमें श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या प्रतिदिन उपस्थित होकर पुण्यलाभ प्राप्त कर रही है।


