Friday, March 6, 2026

तीर्थकर भगवान अरनाथ स्वामी के तप कल्याणक दिवस पर हुई विशेष पूजन

सनावद। जैन धर्म के अठारहवें तीर्थंकर भगवान अरनाथ स्वामी के तप कल्याणक दिवस पर जैन मन्दिरों में भगवान का जलाभिषेक शांतिधारा कर विशेष पूजन अर्चना की गई। चक्रवर्ती का पद त्यागकर दिगम्बरी दीक्षा धारण करने के बाद आपने तपस्या कर मोक्ष प्राप्त किया था। उपरोक्त जानकारी देते हुए धीरेन्द्र बाकलीवाल एवं प्रियम जैन ने बताया कि सुपार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर में सुबह 6.30 बजे नरेश पाटनी, कमलेश भूच, संतोष बाकलीवाल, जंगलेश जैन, शैलू जैन ने भगवान का जलाभिषेक कर नित्य पूजा के बाद अष्ट द्रव्यों से भगवान अरनाथ स्वामी की विशेष पूजन की। आपको अरह‌नाथ स्वामी भी कहा जाता है। आदिनाथ जिनालय में प्रफुल्ल जैन तथा श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बडा मन्दिर में सुनील पंचोलिया सहित श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना कर तप कल्याणक मनाया ।

पार्श्व ज्योति मंच के अध्यक्ष डॉ. नरेन्द्र जैन भारती ने बताया कि प्राचीन तथा पौराणिक नगरी हस्तिनापुर नगर के काश्यप गोत्रीय राजा सुदर्शन की महारानी मित्र सेना की कुक्षि से तीर्थकर अरनाथ का जन्म हुआ था। जिन्होंने चक्रवर्ती का वैभव प्राप्त किया था तथा चक्रवर्ती राजा बने। मेधाच्छ‌ादित आकाश को देखकर आप संसार से विरक्त हो गये। संसार को असार जानकर आप हस्तिनापुर के सहेतुक वन में चले गये वहाँ आपने आम्रवृक्ष के नीचे बैठकर तेला का नियम लेकर मगसिर शुक्ल दसवीं के दिन एक हजार राजाओं के साथ दीक्षा धारण कर तपस्या की थी तथा कर्मों का क्षयकर मोक्ष प्राप्त किया था । मोक्ष प्राप्ति से पूर्व आपने केवलज्ञान प्रकट होने पर जगह – जगह भ्रमण कर समवशरण में धर्मोपदेश देकर लाखों लोगों को तपस्या के माध्यम से कर्म क्षण कर सच्चे सुख को प्राप्त कर परम उपकार किया था। तभी से इस दिन श्रद्धालुजन आपकी पूजा – अर्चना कर पुण्य प्राप्ति की कामना करते हैं।

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