अजय जैन। शाबाश इंडिया। अंबाह। नगर के आदिनाथ दिगम्बर जैन छोटे मंदिर में रविवार की संध्या को भक्ति और आध्यात्मिकता से ओतप्रोत माहौल के बीच 48 दीपकों से भक्तामर महाअर्चना का आयोजन किया गया। यह विशेष महाअर्चना पिछले दो सप्ताह से प्रतिदिन नियमित रूप से की जा रही है। इस पावन अनुष्ठान का सौभाग्य श्रीमती मालती जैन ने प्राप्त किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्र होकर इस दिव्य आराधना के साक्षी बने। श्रीमती ऊषा जैन भण्डारी ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिदिन की तरह संध्या समय आदिनाथ भगवान की वेदी पर विराजमान अतिशयकारी मूर्ति के सामने 48 दीपकों को स्वास्तिक के मंडल पर स्थापित कर अर्चना की जाती है। भक्तामर स्तोत्र के कुल 48 संस्कृत श्लोकों के उच्चारण के साथ प्रत्येक दीपक प्रज्ज्वलित किया जाता है। श्लोकों की गूंज, दीपों की आभा और मंत्रोच्चारण की ऊर्जा से मंदिर परिसर में एक अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण निर्मित होता है।
उन्होंने बताया कि इस अतिशयकारी मूर्ति के सामने सच्ची भावना और श्रद्धा से की गई प्रार्थना हमेशा फलदायी मानी जाती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहाँ रखी गई मनोकामनाएँ भगवान की कृपा से पूर्ण होती हैं। इसी आस्था के चलते प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग भक्तामर महाअर्चना में शामिल होकर अपनी मनोकामनाएँ व्यक्त कर रहे हैं। भक्तामर स्तोत्र जैन परंपरा के सर्वाधिक प्रभावी और चमत्कारिक स्तोत्रों में माना जाता है। 48 काव्यपंक्तियों के माध्यम से भगवान आदिनाथ की वंदना की जाती है। दीपकों के माध्यम से इन श्लोकों की प्रतीकात्मक स्थापना भक्तामर महाअर्चना की विशिष्टता को दर्शाती है। इस अनुष्ठान से आध्यात्मिक शांति, मानसिक संतुलन, स्वास्थ्य लाभ और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने का विश्वास है।
इस आयोजन का संचालन श्री आदिनाथ महिला मंडल द्वारा किया जा रहा है। मंडल की महिलाओं ने बताया कि यह महाअर्चना विश्व शांति, जनकल्याण तथा नगर में सद्भाव की कामना से की जा रही है। पिछले दो सप्ताह से निरंतर चल रहे इस आयोजन में नगर की महिलाएँ, वरिष्ठजन, युवतियाँ और श्रद्धालु बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं। अनुष्ठान के दौरान शांति पाठ, मंगलाचरण और अंत में विश्वकल्याण मंत्र का उच्चारण भी किया गया। महाअर्चना के उपरांत उपस्थित श्रद्धालुओं को आशीर्वचन दिया गया और भगवान आदिनाथ के समक्ष विश्व में सुख, समृद्धि और अहिंसा की वृद्धि की प्रार्थना की गई। भक्तों ने बताया कि लगातार किया जा रहा यह अनुष्ठान न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक एकता का माध्यम भी बन रहा है।


