थ्रोट Cancer Symptoms: कैंसर एक बेहद ही घातक बीमारी है. इसका नाम सुनते ही लोगों के मन में सबसे पहले मौत का ही ख्याल आता है. हालांकि, कैंसर के लक्षणों को पहचान कर इसका इलाज शुरुआती दौर में किया जाए तो काफी हद तक मरीज ठीक हो सकता है. गले के कैंसर के लक्षणों को भी पहले से पहचाना जा सकता है. अगर समय से इसका इलाज शुरू हो जाए तो इस बीमारी से निजात पाई जा सकती है.
जब भोजन निगलने में दिक्कत होने लगे, ऐसा लगे खाना गले में लटका हुआ महसूस हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए,
कान में अगर लगातार दर्द हो और यह दर्द जल्दी न जाय, तो यह गले के कैंसर का संकेत हो सकता है.
Throat Cancer Symptoms: कैंसर का अब भी कोई फूलप्रूव इलाज नहीं है. डब्ल्यूएचओ (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन) के मुताबिक, 2020 में एक करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत के लिए घातक बीमारी कैंसर जिम्मेदार था. इन आंकड़ों पर गौर करें तो हर 6 में से एक मौत कैंसर से होती है. कैंसर ऐसी बीमारी है जिसका नाम सुनते ही सिहरन सी मचने लगती है. इस बीमारी का खौफ लोगों के दिलो दिमाग में बस जाती है. हालांकि, कैंसर के अधिकांश मामलों में ख़राब लाइफस्टाइल, अनहेल्दी खान-पान जिम्मेदार होते हैं. बदलते लाइफस्टाइल ने इस बीमारी को और भी खतरनाक बना दिया. कैंसर के संकेतों का अंदाजा यदि पहले से लगा लिया जाए तो इसका इलाज आसानी से किया जा सकता है. गले का कैंसर ऐसी बीमारी है जिसके संकेत बहुत पहले से दिखने लगते हैं. गले के कैंसर के लिए मुख्य रूप से सिगरेट, शराब, तंबाकू, गुटखा आदि जिम्मेदार होते हैं. यदि समय पर गले के कैंसर के संकेतों पर ध्यान दिया जाए तो इस घातक बीमारी से बचा जा सकता है.
कान में दर्द, गर्दन में सूजन, निगलने में परेशानी जैसे कुछ संकेतों के आधार पर शुरुआत में ही गले के कैंसर की पहचान की जा सकती है. अगर इन संकेतों पर व्यक्ति चौकन्ना हो जाए और डॉक्टर के पास पहुंच जाए तो आसानी से गले के कैंसर का इलाज किया जा सकता है.
गले के कैंसर के प्रकार (Types of Throat Cancer)
गले में कैंसर के लक्षण को जानने से पहले गले में कैंसर के प्रकार को जानना जरूरी है. उसी हिसाब से इसके लक्षण भी सामने आते हैं. मायो क्लिनिक के मुताबिक गले में 6 तरह के कैंसर पनप सकते हैं.1.नेजोफारिंजल कैंसर, यह नासिका छिद्र से शुरू होता है. यानी नाक के ठीक पीछे से शुरू होता है.2.ओरोफायरिंजल कैंसर-यह मुंह के ठीक पीछे से शुरू होता है. टॉन्सिल में कैंसर इसी का हिस्सा है.3.हाइपोफायरिंजल कैंसर-यह गले का निचला हिस्सा है जो फूड पाइप यानी एसोफेगस के उपर होता है.4.ग्लॉटिक कैंसर-यह वोकल कॉर्ड से शुरू होता है.5.सुपरग्लोटिक कैंसर-यह स्वरयंत्र के उपरी भाग से शुरू होता है. इससे खाने को निगला नहीं जाता है.6.सबग्लोटिक कैंसर-यह स्वरयंत्र के नीचे से शुरू होता है.
गले के कैंसर के लक्षण (Symptoms of Throat Cancer)
- कफ-गले के कुछ कैंसर में कफ भरा रहता है. अगर ज्यादा दिनों तक कफ रहे तो इसे नजरअंदाज न करें.
2.आवाज में परिवर्तन-गले का कैंसर होने पर आवाज में भारीपन या बदलाव एकदम शुरुआती लक्षण है. अगर दो सप्ताह तक आवाज में यह बदलाव ठीक नहीं हुआ तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए. - निगलने में परेशानी-जब भोजन निगलने में दिक्कत होने लगे, ऐसा लगे खाना गले में लटका हुआ महसूस हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए. यह गले के कैंसर का संकेत हो सकता है.
4-वजन में कमी-किसी भी तरह के कैंसर होने पर वजन में कमी होती है. इसलिए यदि बिना वजह वजन में अचानक कमी हो जाए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
- कान में दर्द-कान भी गर्दन में ही रहते हैं. इसलिए कान में अगर लगातार दर्द हो और यह दर्द जल्दी न जाय, तो यह गले के कैंसर का संकेत हो सकता है.
- गर्दन के नीचे सूजन– अगर गर्दन के निचले हिस्से में सूजन है और इलाज से भी ठीक नहीं हो रही है तो यह कैंसर का कारण हो सकता है. इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.।
डा पीयूष त्रिवेदी आयुर्वेद विशेषज्ञ शासन सचिवालय जयपुर।


