Friday, March 6, 2026

राग, द्वेष, क्रोध, मान, माया, लाभ मोहनीय कर्म की बाधा दूर करने पर ही शिव मोक्ष का मार्ग मिलेगा :आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित सप्त ऋषियों का 55 वर्षों के बाद शिवाड़ में हुआ भव्य मंगल प्रवेश

टोंक। 55 वर्षों के पूर्व दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी महाराज के साथ मुनि अवस्था में हम शिवाड़ आए थे। शिवाड़ का पुण्य है कि यहां पर आचार्य श्री वीर सागर , श्री शिव सागर जी, श्री धर्म सागर जी, श्री श्रुत सागर जी श्री अजित सागर जी का आगमन हुआ। शिवाड़ शब्द का शाब्दिक अर्थ करते हुए आचार्य श्री ने उपदेश में बताया कि शिव और आड़ अर्थात आपको परिवार की आड़ बाधा रूपी राग, द्वेष, क्रोध ,मान माया ,लोभ तथा मोहनीय कर्म की बाधा को दूर करने पर ही शिव अर्थात मोक्ष मार्ग की प्राप्ति होगी। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने 55 वर्षों बाद नगर प्रवेश पर आयोजित धर्म सभा में प्रगट की गुरु भक्त राजेश पंचोलिया,लोकेश पवन बोहरा अनुसार आचार्य श्री ने आगे उपदेश में बताया कि नगर गौरव श्री नाभीनंदी जी ने इन बाधाओं को दूर किया और आप सबसे ऊपर साधु बनकर मंच पर बैठे हैं पाप और पुण्य कारण दुःख और सुख मिलते हैं संसार में सुख नही है सुख संयम वैराग्य धारण करने पर मिलता हैं। प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश राजकीय अतिथि 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का कई वर्षों के बाद शिवाड़ में दोपहर को मुनि श्री हितेंद्रसागर जी, मुनि श्री चिंतनसागर जी, मुनि श्री भुवनसागर जी , आर्यिका श्री विनम्रमति, आर्यिका श्री प्रणतमति और आर्यिका श्री निर्मोह मति जी शामिल है। कमेटी के अध्यक्ष दिनेश जैन अनुसार मुख्य बाजार में श्री चंद्र प्रभु मंदिर के दीपक , महेश, आशीष, संदीप, अंकित ,गंभीर मल परिवार सहित अनेक समाज जनों ने चरण प्रक्षालन किए । शोभा यात्रा में महिलाओ ने मंगल कलश यात्रा निकाली। समाज जन द्वारा रांगोली बनाकर निवास समक्ष मंगल आरती की गई नगर में अनेक स्थानों पर स्वागत द्वार बनाए जाकर फ्लेक्स लगाए ।मंदिर में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के आशीर्वचन हुए। शोभा यात्रा में निकट के निवाई, टोंक, बोली, पीपल्दा सहित अनेक नगरों से समाज पधारी।

शिवाड़ में हुआ दो संघों का वात्सल्य मिलन
19.11.2025 को दोपहर में धर्मपरायण नगर शिवाड़ की पावन धरा पर बीसवीं सदी के प्रथमाचार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज की अक्षुण्ण परम्परा के पंचम पट्टाधीश, वर्तमान के वर्धमान, वात्सल्य वारिधि, प. पू. आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज के आचार्य श्री 108 इन्द्रनन्दी जी महाराज के शिष्य बालाचार्य श्री 108 निपूर्णनन्दी जी महाराज, मुनि श्री निर्मलनन्दी जी महाराज एवम् शिवाड़ गौरव मुनि श्री नाभिनन्दी जी महाराज ससंघ ने दर्शन भक्ति पूर्वक कर चरण प्रक्षालन किए। वात्सल्य पूर्ण भव्य मिलन हुआ।नगर गौरव प.पू. मुनि श्री 108 नाभिनन्दी जी महाराज का भी दीक्षा के पश्चात् पहली बार यहां मंगल प्रवेश हुआ। उल्लेखनीय है कि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 55 वर्षों के बाद आचार्य होने के बाद पहली बार प्रवेश हुआ। समाज द्वारा टोंक नगर सहित अन्य नगरों में भी जाकर आचार्य श्री को शिवाड़ आने हेतु श्रीफल भेंट कर निवेदन किया।

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