एक समय की बात है, एक राजा के यहाँ बेटा पैदा नहीं हो रहा था। लालच और मोह में अंधा होकर राजा किसी तांत्रिक की सलाह में आ गया। तांत्रिक ने कहा कि अमावस्या की रात किसी लड़के की बलि चढ़ा दी जाए तो एक साल के भीतर पुत्र प्राप्ति हो जाएगी। राजा ने बिना सोचे-समझे यही आदेश दे दिया। अगले दिन पूरे राज्य में घोषणा करवाई कि जो भी अपने घर का बच्चा बलि के लिए देगा, उसे ढेर सारा धन पुरस्कृत किया जाएगा। एक गरीब परिवार ने यह सुना और सोच लिया कि उनके घर का सबसे छोटा लड़का उनके किसी काम का नहीं है, इसलिए उसे भेज देते हैं। वह मासूम बच्चा राजदरबार पहुँचा, बलि की सारी तैयारी हो चुकी थी। राजा ने उससे उसकी आखिरी इच्छा पूछी। लड़के ने कहा—“मुझे थोड़ी सी गीली मिट्टी चाहिए।” मिट्टी लाई गई।
उस मासूम ने उसी मिट्टी से चार छोटे-छोटे घर बनाए। फिर उसने एक-एक करके तीन घर लात मारकर तोड़ दिए और एक घर को रहने दिया। उसके बाद वह राजा के सामने हाथ जोड़कर बोला—“अब मेरी बलि चढ़ा दीजिए।”
राजा हैरान रह गया। उसने सोचा शायद बच्चे ने कोई तांत्रिक विद्या की है। उसने उससे पूछा कि तुमने यह क्या किया?
लड़का शांत स्वर में बोला— “पहला घर मेरे माँ-बाप का था, जिन्होंने मुझे पैसों के लिए बेच दिया—इसलिए उसे गिरा दिया। दूसरा घर रिश्तेदारों का था, जिन्होंने मेरे माता-पिता को रोकने की कोशिश भी नहीं की—इसलिए वह भी गिरा दिया। तीसरा घर आपका था—क्योंकि राजा का काम रक्षा करना होता है, लेकिन आप लालच में इतने अंधे हो गए कि एक निर्दोष बच्चे की बलि देने चल पड़े—इसलिए उसे भी गिरा दिया। और यह चौथा घर मेरे भगवान का है। उसके आगे मैं हाथ जोड़कर कह चुका हूँ—अब सब तू ही संभाल लेना।”
राजा यह सुनकर भीतर तक हिल गया। उसने सोचा—अगर किसी हँसती-खेलती जिंदगी को खत्म करके मुझे बेटा मिल भी गया, तो उसकी कीमत क्या होगी? मेरे राज में अन्याय हो सकता है, लेकिन ऊपरवाले की डायरी में कोई गलती नहीं होती। राजा रो पड़ा। उसने उस बच्चे को गले लगाया और कहा—“आज से तू ही मेरा बेटा है।”इस कहानी का भाव यह है कि दुनिया के आगे झुकने से कभी भला नहीं होता। दुनिया अपने मतलब के लिए किसी को भी बेच सकती है, धोखा दे सकती है, और किसी का भी जीवन बर्बाद कर सकती है। झुकना है तो सिर्फ उसी के सामने झुको जिसने यह सृष्टि बनाई है। वही आपका सच्चा रक्षक है। जब ईश्वर साथ होता है, तो दुनिया की कोई ताकत आपका बाल भी बाँका नहीं कर सकती। समर्पण करना है तो परमपिता परमात्मा को करो—बाकी सब अपने आप सही हो जाएगा।


