टोंक । समवशरण में विराजित भगवान वितरागी सर्वज्ञ और हितोपदेसी है, उन्हें राग द्वेष नहीं होता है उनकी दिव्य देशना को तीन गति के जीव 12 कक्ष में बैठकर दिव्य देशना का श्रवण करते हैं। रत्न स्वर्ण के समवशरण में विराजित भगवान के पुण्य प्रताप से पाषाण के मान स्तंभ को देखकर मान अभिमान गलित नष्ट हो जाता हैं यह धर्म देशना अतिशय कारी धर्म नगरी टोंक में संघ सहित विराजित वात्सल्य वारिधी पंचम पट्टाधीश 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रगट की।राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे उपदेश में बताया कि संसारी प्राणी राग द्वेष में डूबे हैं संसार रूपी भव समुद्र से जिनालय में विराजित भगवान सद राह दिखाते हैं क्योंकि पंच कल्याणक में धार्मिक क्रियाओं सूरी मंत्रों से प्रतिमाओं में भगवान के गुणों का आरोपण कर उन्हे पूज्य बनाया जाता हैं। ज्येष्ठा और श्रेष्ठता मानने से नहीं गुणों से होती हैं 20 वी सदी में नवरत्न के रूप में प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी हुए जिन्होंने जिनालय में भी विजातीय प्रवेश के विरोध में 1105 दिनों तक अन्न आहार का त्याग कर अपने प्राणों की बाजी लगा दी थी। महापुरुष हमेशा उपकार करते है आचार्य श्री शांति सागर जी ने मुनिचर्या का निर्दोष पालन कर आदर्श प्रस्तुत किया।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने सभी को छोटे छोटे नियम व्रत त्याग से जीवन को उत्कृष्ट ओर मंगलमय बनाने का आशीर्वाद दिया। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री मुमुक्षु सागर जी ने उपदेश में परमात्मा के गुण बता कर बताया कि भक्ति की शक्ति से मुक्ति मिलती हैं समाज के धर्म प्रचारक प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार अनुसार धर्म सभा में श्रीजी और पूर्वाचार्य का चित्र का अनावरण दीप प्रवज्जलन सुशीला देवी, ज्ञानचंद, नवीन बिल्टी वाला परिवार जयपुर, ऋषभ कुमार, मयूर कुमार पचोरी परिवार पारसोला, आदेश जैन पारसोला एवं वर्धमान महिला मंडल काफला बाजार टोंक द्वारा किया जाकर आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की इस मौके पर झाड़ोल से पधारे कलाकार भाई गोरधन एवं सुनील सर्राफ के भक्तिमय भजनों पर बड़े भक्ति भाव से भक्ति नृत्य करते हुए श्रद्धालुओं अष्टद्रव्य समर्पित किया । आचार्य श्री की आज की आहारचर्या कराने का सौभाग्य प्रेमचंद अशोक कुमार झिराना व नेमीचंद जितेंद्र कुमार बनेठा वालो को मिला इस मौके पर आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ने सभी श्रावकों को मीठा त्याग देकर नियम दिलाया प्रतिदिन प्रदेश भर श्रद्धालु आचार्य श्री जी के दर्शन के लिए आ रहे हैं।
आचार्य शांतिसागर शताब्दी महोत्सव के अंतर्गत कजोड़मल, पारसमल परिवार ने दो कलश, मुन्नालाल पारस मनोज बहड परिवार, कमल कुमार, वैभव कुमार फूलेता परिवार, समभीर मल, भगवान दास छामुनिया परिवार ने कलश स्थापित किए।
इस मौके पर मीडिया प्रकोष्ठ रमेश काला कमल सर्राफ, नरेंद्र दाखिया, नीटू छामुनिया, पंकज फूलेता, ओम ककोड़, वीरेंद्र संघी, पंकज छामुनिया, लोकेश कल्ली, प्रदीप बगड़ी, ज्ञानचंद दाखिया, मनीष शिवाड़िया, सुमित दाखिया, अम्मू छामुनिया, उमेश संघी, नरेंद्र ककोड़, सुरेन्द्र अजमेरा, प्रकाश पटवारी, अशोक छाबड़ा, ज्ञान संघी, पारस उम, सोनू पासरोटियां, मनीष अतार अंकुर पाटनी आदि समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे।


