टोंक। बीसवीं सदी के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की अक्षुण्ण परंपरा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ का वर्षायोग 2025 हेतु सोमवार को टोंक नगरी में भव्यातिभव्य ऐतिहासिक मंगल प्रवेश हुआ।
भुगर्भ से प्रकटित 65 जिनबिंबों की अतिशयकारी नगरी भगवान आदिनाथ की इस पावन भूमि पर 55 वर्षों की प्रतीक्षा के उपरांत प्रभु चरणों का स्पर्श होने से नगर का कण-कण पुलकित हुआ।
सुबह 7 बजे से ही टोंक एवं आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु स्वागत हेतु उमड़ पड़े। टोंक के मुख्य द्वार पर भव्य तोरण द्वार एवं जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए। जयकारों के बीच 7:15 बजे आचार्य श्री ने ससंघ नगर सीमा में प्रवेश किया। जिला कलेक्टर श्रीमती कल्पना अग्रवाल, जिला पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान, जिला प्रमुख श्रीमती सरोज बंसल, पूर्व नगर परिषद सभापति श्रीमती लक्ष्मी देवी जैन, युवा नेता विनायक जैन, नरेश बंसल सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु उपस्थित रहे। प्रवेश द्वार पर आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन हुआ। इसके उपरांत घोड़ों, ऊंटों, बैंड-बाजों, कलश यात्रा व श्रद्धालुओं के जयकारों के साथ शोभायात्रा जैन नसिया मंदिर पहुंची। वहां मन्दिर में दर्शन पश्चात श्री संघ मंचासीन हुआ।

धर्मसभा का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं चित्र अनावरण से हुआ। मंच संचालन विकास अतार व कमल सर्राफ ने किया। विनोद सर्राफ, हेमराज नमक वाले (निवाई), रचना टोरड़ी एवं अंजना मंडावर ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया।
आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन श्रेष्ठी सौरभ कुमार आंडरा, जंबू कुमार आंडरा, टोनी कुमार आंडरा शुभ कुमार परिवार द्वारा किया गया। शास्त्र भेंट श्रेष्ठी महावीर प्रसाद पासरोटिया, धर्मेंद्र कुमार पासरोटिया, जितेंद्र कुमार पासरोटिया, अविकांश कुमार पासरोटिया परिवार द्वारा किया गया।
चातुर्मास प्रबंध समिति की ओर से श्रीफल भेंट कर चातुर्मास की स्वीकृति प्राप्त की गई।
अपने मंगल संदेश में आचार्य श्री ने कहा—
“संयम और भक्ति से जीवन सार्थक होता है। गुरु का आशीर्वाद शिष्य को संकल्प और साधना की शक्ति देता है।”
उन्होंने स्मरण किया कि सन 1970 में वे अपने दीक्षा गुरु आचार्य धर्म सागर जी के साथ चातुर्मास में टोंक पधारे थे।
धर्मसभा में आचार्य श्री अजित सागर जी का भी गुणानुवाद किया गया।
इस ऐतिहासिक अवसर पर गज्जू भैया, प्रमित जैन, तारा देवी सेठी का विशेष अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालु जयपुर, किशनगढ़, कोटा, निवाई, लावा, डिग्गी, टोडा, देवली, पिपलु, उनियारा, इचलकरंजी, धरियावद, सनावद, जोबनेर, इंदौर सहित अनेक स्थानों से उपस्थित हुए।
नगर के युवाओं, समिति और समाजजनों के अद्भुत समर्पण से यह मंगल प्रवेश स्मरणीय बन गया।
55 वर्षों का विहार आपका, दिग्विजय सा लगता है
जहां पहुंच जाते हैं गुरुवर, समवसरण वहीं लगता है।
तेरी चर्या से गुंजित गर्जित, गर्वित हो गया गगन,
शांति सिंधु के ध्वजवाहक तुमको शत-शत नमन।
इस मौके पर समाज के अध्यक्ष पदमचंद आंडरा, मंत्री महावीर प्रसाद देवली, उपाध्यक्ष नरेंद्र कुमार फागी, चातुर्मास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष भागचंद फुलेरा कार्यवाहक अध्यक्ष धर्मचंद दाखियाँ, सहमंत्री पप्पू नमक, उपाध्यक्ष राजेश बोरदा, कोषाध्यक्ष लालचंद फुलेता, अशोक झराना, अनिल आड़रा, अनिल सर्राफ, प्रवक्ता पवन कंटान, विकास जागीरदार, कमल सर्राफ,मनीष अत्तार, अर्पित पासरोटिया, नीटू छामुनिया आदि समाज के लोग उपस्थित थे


